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  • Writer's pictureKapil Pund

Essay Kaise ?

नमस्ते , आप सब तो मुझे जानते ही होंगे. मुझे निबंध  लिखने की सजा  हुई है. माननीय जज साहब से मैं पूछना चाहता हूँ आखिर मैंने ऐसा  क्या कर दिया जो मुझे पढाई लिखाई की सजा दी जा रही हैं, इससे अच्छा तो मुझे तिहार जेल में ही डाल देते. काम से काम १०-१५ साल बाद राजू अंकल को पैसे देके मैं एक बायोपिक बनवा लेता. अगर मुझे पढाई लिखाई में रूचि होती , तो क्या बात थी.  खैर , माननीय जज साहब ने जो बोला हैं  वो तो करना पड़ेगा। मैं शुरवात से शुरू करता हु।

 

मेरा जन्म भी आप सभी की तरह एक मध्यम वर्ग परिवार में हुआ. जब मेरे क्लास  के बच्चो को पॉकेटमनी के तौर पर उनके घरवाले कॅश देते थे, मुझे बस एक क्रेडिट कार्ड मिला, वो भी कुछ लाख की लिमिट का। हमारा भी घर बस ६ -७ कमरों



का ही हैं. मैं बस इतना बताना चाहता हु , की मैं भी आप जैसा ही हूँ, आप कृपा करके मुझे गलत मत समझे. जब जब घर में गेहू का आटा ख़तम हो जाता था, तब हमने भी almond flour से बनी हुई रोटियां खाके दिन गुजारे हैं. मैं उम्मीद करता हु की आप समझ सकते हैं।

 

हर परिवार की तरह हमारी भी इच्छा थी की हम भी एक फॅमिली कार खरीदें , जिसमे घर के सब सदस्य घूमने जा सके. हमें एक ७ सीटर गाडी लेनी थी , जैसे की मारुती एर्टिगा ,  लेकिन आर्थिक परिस्थिति के चलते हमें Porsche लेनी पड़ी.

 

बचपन से ही मुझे हमारी संस्कृति एवं सभ्यता के बारेमे काफी कुछ सिखाया गया. जो इस दुनिया में आता हैं वो एक न एक दिन जायेगा, ये हमारे शास्त्रों का मूलमंत्र हैं. इस देश में  , जहाँ पे कोई भी काम समय पर नहीं हो पाता , मैंने एक काम समय के पहले कर दिखाया। आखिरकार शरीर  तो नश्वर हैं, आत्मा अमर हैं. क्या ये धर्म का काम नहीं हैं, की मेरे हाथो से किसी को मोक्ष की प्राप्ति हुई.

 

अब मीडिया में ऐसी बाते बोली जा रही हैं की मेरे देवतुल्य पिताजी ने पुलिस  प्रशासन तथा स्थानिक और नेताओंको लाखो रुपये दिए ये घटना "दबा देने " के लिए ! मैं  इसका खंडन करना चाहूंगा। भला क्यों हम लाखो रुपये देंगे जब इन सबकी औकात तो कुछ कौड़ियों की भी नहीं हैं. पैसे की बचत करना हमें बचपन से ही सिखाया गया हैं। हर साल वैसे भी हम देश के प्रति हमारे योगदान के तौर पर इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदते रहते हैं.

 

जाते जाते मैं बस इतना कहूंगा की इस विषय को यही पे समाप्त कर दिया जाये क्युकी ये सब मेरे बाल मन को काफी आहत कर रहा हैं. क्या आप नहीं चाहते की देश का एक युवा यूरोप या अमरीका जाकर सेटल हो जाए जहाँ पर कानून के लम्बे हाथ न पहुंच सकें ? लगता हैं मैं ३०० के ऊपर शब्द लिख चूका हु, काश इन एक्स्ट्रा शब्दों के लिए मैं किसी  को पैसे चार्ज कर पाता , जैसे फ्लैट बेचते समय कुछ बिल्डर्स एक एक इंच का पैसा लेते हैं। खैर आपको तो पता ही हैं, इस देश में हमारे जैसे मध्यम वर्ग से आनेवाले लोगो की किसे पड़ी हैं ?

 

अब रुकता हूँ , वैसे भी मेरे थेरेपी का वक्त हो चूका हैं।

 

जय हिन्द , जय संविधान 


#टूडल्स

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5 Comments


vivek.skumar
May 23

मैं इस लेकख का आलोचना करता हूं जो एक गरीब के गरीबी का मजाक उड़ाता है और हमारे महान न्याय व्यवस्था के सिर्फ बुरे पहलू को बताता है।

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Kapil Pund
Kapil Pund
May 23
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न्याय व्यवस्था की बुराई ? ये पाप मैं कदापि नही कर सकता

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Rahul Gaikwad
Rahul Gaikwad
May 22

Kapil paji start writing script for koregaon file 😀

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Rahul Gaikwad
Rahul Gaikwad
May 22

Kya bat hai 😂

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Apurva Shimpi
Apurva Shimpi
May 22

Kya khoob!! 10/10

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